बीकानेर ने दिया ज्ञापन
भारत के स्वतंत्रता दिवस को विजय दिवस के रूप में मनाने और राष्ट्रपति को राष्ट्र अध्यक्ष के रूप में संबोधित किया जाए के संदर्भ में।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात अंग्रेजों का भारत छोड़ना और देश को स्वशासन प्रणाली से शासन स्थापित करना,
इसके लिए हमारे तत्कालीन राजनेताओं ने इस शासन प्रणाली की उपलब्धि पर इसे *स्वतंत्रता दिवस* का नाम दिया,
स्वतंत्रता दिवस से आम भारतीय में, हमारी आने वाली पीढ़ी में *एक गुलामी का बोध होता है* हमारी पीढ़ी यह समझती है कि हम कभी गुलाम रहे।
इससे आने वाले पीढ़ी अपने विचारों को गुलाम मानकर ही आगे बढ़ेगी,
हमारा सरकार से निवेदन है कि इस दिवस को *विजय दिवस* के रूप में मनाया जावे।
विजय दिवस से *आम भारतीय में उत्साह और गर्व का संचार होता है* कि हमने अंग्रेजों पर विजय प्राप्त की।
*ज्ञात रहे 1857 से लेकर 1947 तक जो संघर्ष चला, उस संघर्ष का नाम भी हमने स्वतंत्रता संग्राम दिया* किसी से संग्राम होता है और संग्राम में सामने वाला व्यक्ति संग्राम को छोड़ दे, छोड़कर चला जाए तो उसे हराने वाले या भगाने वाले व्यक्ति या समुदाय की विजय कहलाती है।
*हमें यह मानना चाहिए कि कोई भी सशक्त प्रशासन हारे बिना शासन नहीं छोड़ता है और अंग्रेजों ने हार कर ही, भारत को छोड़ा था भारत के लोगों को सत्ता सौंपी थी "ना कि प्रेम से दया करके" हमारे पूर्वजों ने* *अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया था ना* कि वह अपनी स्वेच्छा से गए थे।
*इसलिए हमने अंग्रेजों पर विजय प्राप्त की इसलिए यह विजय दिवस होना चाहिए*
यह तथाकथित अंग्रेजो के द्वारा भारतीयों को मूर्ख बनाने की साजिश के तहत तत्कालीन अंग्रेजी मानसिकता के भारतीय नेताओं ने इसे *स्वतंत्रता दिवस* का नाम दिया
इससे हमारी गुलाम मानसिकता बनी रहे और हमेशा हम हीन भावना से जीते रहे ।
इसलिए इसे विजय दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया जाए।
हम भारतीयों ने अंग्रेजों पर विजय प्राप्त की और अंग्रेजों को जबरदस्ती भारत से निकाला था ।
इसलिए हमने उन पर विजय प्राप्त की *ना की किसी ने दया करके हमें स्वतंत्रता दी, इसलिए सरकार ईसे विजय दिवस के रूप में मनाएं*
हमारा भारत की सरकार से एक और निवेदन है भारत के राष्ट्रपति को राष्ट्रपति नाम से नही *राष्ट्रीय अध्यक्ष* के रूप में संबोधित किया जाए जैसा कि *अंग्रेजी में प्रजीडेन्ट ऑफ इंडिया लिखते* वैसे इसे राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मान्य किया जाए।
राष्ट्रपति शब्द गुलामी का प्रतीक है *पति का मतलब होता है मालिक* कोई भी व्यक्ति भारत का मालिक नहीं है यह लोकतंत्र है, लोकतंत्र में भारत के 138 करोड लोग मालिक हैं, हम उनमें से एक अध्यक्ष चुनते हैं, जो हमारा संरक्षक बनकर कार्य करता है।
इसलिए मालिक शब्द को हटाया जावे इसलिए *राष्ट्रपति* के स्थान पर *राष्ट्रीय अध्यक्ष* कहा जाए।
रामकुमार सोलंकी
संयोजक
सनातन धर्म प्रचारिणी सभा
बीकानेर
9414049081
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