कल से लग रहे हैं श्राद्ध
१ सितंबर पूर्णिमा का श्राद्ध २ सितंबर प्रतिपदा का श्राद्ध ३ सितंबर द्वितीया का श्राद्ध ( पार्वण ) ४ सितंबर द्वितीया का श्राद्ध ( एकोदिष्ट ) ५ सितंबर तृतीया का श्राद्ध ६ सितंबर चतुर्थी का श्राद्ध ७ सितंबर पंचमी का श्राद्ध ८ सितंबर षष्ठी का श्राद्ध ९ सितंबर सप्तमी का श्राद्ध १० सितंबर अष्टमी का श्राद्ध ११ सितंबर नवमी का श्राद्ध १२ सितंबर दशमी का श्राद्ध १३ सितंबर एकादशी का श्राद्ध १४ सितंबर द्वादशी का श्राद्ध , संन्यासियों का श्राद्ध १५ सितंबर त्रयोदशी का श्राद्ध १६ सितंबर चतुर्दशी का श्राद्ध १७ सितंबर सर्वपितृ अमावस्या।
भाद्रपद माह की पूर्णिमा के दिन से आश्विन माह की अमावस्या तक की समयावधि पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष के नाम से जानी जाती है । इस दौरान पूर्वजों ( पितरों ) के निमित्त पिंडदान , तर्पण , दान आदि कर्म करके उनके प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है । इससे पितरों की आत्मा को शान्ति मिलती है । इस बार पूर्णिमा का श्राद्ध १ सितंबर को मध्याह्न व्यापिनी तिथि में किया जायगा और प्रतिपदा का श्राद्ध २ सितंबर को किया जाएगा , लेकिन इस वर्ष आश्विन माह का प्रारंभ ३ सितंबर से हो रहा है । अतः इसका बहुत महत्व है ।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
thank